हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, क़ुम के इमामे जुमा आयतुल्लाह अली रज़ा आराफ़ी ने कहा कि हालिया युद्ध ने अमेरिका की सैन्य, आर्थिक और राजनीतिक कमज़ोरियों को उजागर कर दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान अब दुश्मन के मुक़ाबले में रणनीतिक धैर्य और तथाकथित मसलहतों के नाम पर पीछे हटने की नीति जारी नहीं रखेगा।
23 अक्टूबर 2026 को क़ुम के मुसल्ला-ए-क़ुद्स में नमाज़े जुमा के ख़ुत्बों को संबोधित करते हुए आयतुल्लाह अली रज़ा आराफ़ी ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान और महवरे मुक़ावमत पर युद्ध थोपा। ईरान ने युद्ध शुरू नहीं किया था, बल्कि बातचीत के दौरान समझौतों का उल्लंघन करके उसके विरुद्ध कार्रवाई की गई।
उन्होंने कहा कि इस युद्ध का उद्देश्य ईरान और उम्मते इस्लामिया को झुकने पर मजबूर करना था, लेकिन आठ महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद विरोधी अपने उद्देश्यों में सफल नहीं हो सके। ईरानी जनता और महवरे मुक़ावमत ने दृढ़ता का प्रदर्शन किया और अपना प्रतिरोध जारी रखा।
आयतुल्लाह आराफ़ी ने कहा कि व्यापक सैन्य और ख़ुफ़िया शक्ति होने के बावजूद अमेरिका कई कमज़ोरियों से ग्रस्त है, जो हालिया युद्ध के दौरान सामने आई हैं।
अमेरिका की दस कमज़ोरियाँ
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दुनिया में अमेरिका के प्रति नफ़रत में वृद्धि: आयतुल्लाह आराफ़ी के अनुसार, अमेरिका पर वैश्विक भरोसे में उल्लेखनीय कमी आई है और दुनिया में उसके प्रति नफ़रत बढ़ी है। उन्होंने कहा कि ख़ुद को विश्व शक्ति समझने वाली सरकार के लिए यह स्थिति गंभीर है।
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सैन्य शक्ति के बावजूद कमज़ोरी: उन्होंने कहा कि हालिया युद्ध ने साबित किया कि बड़े युद्धपोतों, आधुनिक हथियारों और व्यापक ख़ुफ़िया संसाधनों के बावजूद अमेरिका अपरंपरागत युद्ध में कमज़ोर पड़ सकता है।
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ईरान के नए प्रभावी साधन: उनके अनुसार, हुर्मुज़ जलडमरूमध्य, तेल की क़ीमतों, वैश्विक बाज़ारों और आर्थिक मार्गों के महत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान और महवरे मुक़ावमत के पास ऐसे साधन हैं, जो विश्व अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं।
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अमेरिका और इस्राइल के बीच आंतरिक मतभेद: आयतुल्लाह आराफ़ी ने कहा कि युद्ध के बाद अमेरिका और इस्राइल के भीतर राजनीतिक मतभेद और गुटबंदी तेज़ हुई है, जिससे उनकी आंतरिक समस्याएँ अधिक स्पष्ट हो गई हैं।
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संभावित लक्ष्यों की सूची में वृद्धि: उन्होंने कहा कि हालिया युद्ध के परिणामस्वरूप विरोधियों के संभावित लक्ष्यों की सूची और विस्तृत हो गई है। यदि उन्होंने दोबारा हमला करने की कोशिश की, तो उन्हें नई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
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हमला करके बिना जवाब के लौट जाने का दौर समाप्त: आयतुल्लाह आराफ़ी ने कहा कि अब ईरान पर हमला करके बिना किसी जवाबी कार्रवाई के लौट जाने का दौर समाप्त हो चुका है। ईरान की सशस्त्र सेनाएँ और जनता अपने रहबर के निर्देशों के अनुसार जवाब देने के लिए तैयार हैं।
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ईरान की रणनीतिक धैर्य की नीति का अंत: उन्होंने कहा कि ईरान अब पड़ोसी देशों या अन्य मसलहतों को ध्यान में रखते हुए दुश्मन के मुक़ाबले में अपनी नीति को सीमित नहीं रखेगा।
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इस्राइल की बुनियादों का कमज़ोर होना: उनके अनुसार, कुछ मोर्चों पर सफलता के बावजूद इस्राइल की आंतरिक बुनियादें कमज़ोर हैं और उसे भविष्य की ऐसी शक्ति नहीं समझना चाहिए जिसे पराजित नहीं किया जा सकता।
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अमेरिकी अर्थव्यवस्था की कमज़ोरियाँ: आयतुल्लाह आराफ़ी ने कहा कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था बड़ी अवश्य है, लेकिन उसे भी नुकसान पहुँचाया जा सकता है। वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के परस्पर जुड़ी होने के कारण दूसरे देश भी इससे प्रभावित होते हैं।
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अमेरिका के अत्याचार और अहंकार का उजागर होना: उन्होंने कहा कि हालिया घटनाओं ने दुनिया के सामने अमेरिका के अहंकार, शक्ति के नशे और दूसरे राष्ट्रों पर दबाव डालने की उसकी नीति को और अधिक स्पष्ट कर दिया है।
राष्ट्रीय एकता और रक्षा तैयारियों पर ज़ोर
आयतुल्लाह आराफ़ी ने ईरानी अधिकारियों से अपील की कि वे दुश्मन के सामने कमज़ोरी न दिखाएँ और देश की रक्षा, अर्थव्यवस्था तथा जनता की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पूरी तैयारी रखें। उन्होंने कहा कि आर्थिक समस्याओं के समाधान के लिए अधिक प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि दुश्मन किसी ग़लत अनुमान के आधार पर कार्रवाई करने से बचे।
उन्होंने राष्ट्रीय एकता को समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताते हुए कहा कि ईरान, इस्लाम और रहबरे इंक़िलाब के नेतृत्व के इर्द-गिर्द एकता तथा समन्वय बनाए रखना आवश्यक है।
आयतुल्लाह आराफ़ी ने सशस्त्र सेनाओं को तैयार रहने की ताकीद की और जनता से भी अपील की कि वह नमाज़े जुमा, धार्मिक आयोजनों और इस्लामी प्रतीकों के संरक्षण के माध्यम से अपनी एकजुटता और उपस्थिति का प्रदर्शन जारी रखे।
आज़रबाइजान में हिजाब और सऊदी अरब तथा बहरीन में क़ैदियों का मामला
क़ुम के इमामे जुमा ने आज़रबाइजान गणराज्य की सरकार से कहा कि हिजाब सहित इस्लामी मूल्यों का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि हिजाब के विरुद्ध उठाए जाने वाले कदम बंद होंगे और मुस्लिम महिलाओं के धार्मिक अधिकारों की रक्षा की जाएगी।
उन्होंने सऊदी अरब और बहरीन में उलमा तथा युवाओं को लंबे समय तक क़ैद रखने पर भी चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि इन देशों की सरकारों को इस ज़ुल्म पर आधारित रवैये को समाप्त करना चाहिए। साथ ही, ईरान सहित इस्लामी दुनिया के कूटनीतिक संस्थानों को क़ैदियों की रिहाई के लिए कदम उठाने चाहिए।
हज़रत फ़ातेमा ज़हरा (स) की महानता और प्रतिष्ठा
पहले ख़ुत्बे में आयतुल्लाह आराफ़ी ने हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) के मक़ाम और प्रतिष्ठा पर चर्चा करते हुए कहा कि शिया और अहले सुन्नत के बीच कुछ मतभेदों के बावजूद, आपकी शख़्सियत और फ़ज़ीलतों के संबंध में अनेक साझा मान्यताएँ मौजूद हैं।
उन्होंने बताया कि मजमा-ए-जहानी तक़रीब मज़ाहिब इस्लामी के सहयोग से तैयार की गई पुस्तक ‘अस्सुन्नतुन नबविय्या फ़ी मसादिरिल मज़ाहिबिल इस्लामिय्या’ के सातवें खंड में हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) की फ़ज़ीलतों और विशेषताओं के संबंध में शिया तथा अहले सुन्नत की प्रमाणिक पुस्तकों से 800 से अधिक रिवायतें संकलित की गई हैं। इन रिवायतों में आपके सौ से अधिक गुणों और विशिष्टताओं का उल्लेख है।
उन्होंने हज़रत फ़ातेमा ज़हरा (स) को ज्ञान, इबादत, पवित्रता, हया, पाकदामनी, हिजाब और तरबीयत का आदर्श बताते हुए कहा कि आपकी ज़िंदगी महिलाओं और पुरुषों, दोनों के लिए मार्गदर्शक है। आपने घर और समाज में अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभाने के साथ रसूले ख़ुदा (स) का समर्थन किया, मुजाहिदीन की सहायता की और विलायत का बचाव किया।
आयतुल्लाह आराफ़ी ने कहा कि रसूले ख़ुदा (स) के बाद पैदा हुए संकटों के दौरान हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) ने सत्य और विलायत की रक्षा के लिए ऐतिहासिक भूमिका निभाई। कठिनाइयों और मज़लूमीयत के बावजूद आपने सत्य का परचम बुलंद रखा और उम्मत को गुमराही से बचाने का प्रयास किया।
उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं की प्रगति का रास्ता ज्ञान और पहचान से दूरी बनाना नहीं, बल्कि ज्ञान, आध्यात्मिकता, पवित्रता और सामाजिक भूमिका के बीच संतुलन स्थापित करना है। हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) की सीरत इसका स्पष्ट उदाहरण है कि एक महिला पवित्रता और हिजाब की सीमाओं का पालन करते हुए ज्ञान, सामाजिक सेवा और नेतृत्व के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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